Jesus Hindi

नीतिवचन 7

नीतिवचन 7 1 हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़। 2 मेरी आज्ञाओं को मान, इस से तू जीवित रहेगा, और मेरी शिक्षा को अपनी आँख की पुतली जान; 3 उनको अपनी उँगलियों में बान्ध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले। 4 बुद्धि से कह कि, “तू … Read more

नीतिवचन 6

संकटपूर्ण वायदा नीतिवचन 6 1 हे मेरे पुत्र, यदि तू अपने पड़ोसी का उत्तरदायी हुआ हो, अथवा परदेशी के लिये हाथ पर हाथ मार कर उत्तरदायी हुआ हो, 2 तो तू अपने ही मुँह के वचनों से फँसा, और अपने ही मुँह की बातों से पकड़ा गया। 3 इसलिये हे मेरे पुत्र, एक काम कर, अर्थात् तू जो … Read more