Jesus Hindi

नीतिवचन 17

नीतिवचन 17 1 चैन के साथ सूखा टुकड़ा, उस घर की अपेक्षा उत्तम है, जो मेलबलि-पशुओं से भरा हो, परन्तु उस में झगड़े रगड़े हों। 2 बुद्धि से चलनेवाला दास अपने स्वामी के उस पुत्र पर जो लज्जा का कारण होता है प्रभुता करेगा, और उस पुत्र के भाइयों के बीच भागी होगा। 3 चाँदी के लिये कुठाली, … Read more

नीतिवचन 16

  नीतिवचन 16 1 मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है, परन्तु मुँह से कहना यहोवा की ओर से होता है। 2 मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है, परन्तु यहोवा मन को तौलता है। 3 अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इस से तेरी कल्पनाएँ सिद्ध होंगी। 4 यहोवा ने सब वस्तुएँ … Read more