Jesus Hindi

भजन संहिता 115

 मूर्तियों की निरर्थकता और परमेश्वर की विश्वसनीयता भजन संहिता 115 1 हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन् अपने ही नाम की महिमा, अपनी करुणा और सच्चाई के निमित्त कर।   2 जाति-जाति के लोग क्यों कहने पाएँ, “उनका परमेश्वर कहाँ रहा?”   3 हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में हैं; उसने जो चाहा वही किया है।   4 उन … Read more

भजन संहिता 114

 फसह का गीत भजन संहिता 114 1 जब इस्राएल ने मिस्र से, अर्थात् याकूब के घराने ने अन्य भाषावालों के मध्य में कूच किया, 2 तब यहूदा यहोवा का पवित्रस्थान और इस्राएल उसके राज्य के लोग हो गए। 3 समुद्र देखकर भागा, यर्दन नदी उलटी बही। (भज. 77:16) 4 पहाड़ मेंढ़ों के समान उछलने लगे, और पहाड़ियाँ, भेड़-बकरियों के … Read more