उड़नेवाली चर्मपत्री का दर्शन जकर्याह 5 1 मैं ने फिर आँखें उठाईं तो क्या देखा, कि एक लिखा हुआ पत्र उड़ रहा है। 2 दूत ने मुझ से पूछा, “तुझे क्या देख पड़ता है?” मैं ने कहा, “मुझे एक लिखा हुआ पत्र उड़ता हुआ देख पड़ता है, जिस की लम्बाई बीस हाथ और चौड़ाई दस हाथ की … Read more