ज्ञान का मूल्य नीतिवचन 2 1 हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े, 2 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे; (नीति. 23:12) 3 और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे, 4 और उसको चाँदी … Read more