नीतिवचन 7 1 हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़। 2 मेरी आज्ञाओं को मान, इस से तू जीवित रहेगा, और मेरी शिक्षा को अपनी आँख की पुतली जान; 3 उनको अपनी उँगलियों में बान्ध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले। 4 बुद्धि से कह कि, “तू … Read more